March 2009


Anal& Hindi& Stories31 Mar 2009 05:49 am

कहानी है एक खुशहाल परिवार की जिसमें एक भाई रोहित २१ साल का, बहन सीमा १८ साल की, डैडी श्री सूर्यकान्त और उनकी पत्नी साक्षी हैं।

सूर्यकान्त: मेरी टाई नहीं मिल रही साक्षी, कहाँ है?

साक्षी : यहीं होगी…………….ओह ! ये रही, आप भी ना !………..

रोहित : मम्मी मेरे जूते नहीं दिख रहे !

साक्षी : तुम आकर जाने कहाँ रख देते हो? तुम्हारा रोज़ का यही काम होता है, ये लो ! और आज सम्भाल कर रखना !

हर रोज़ इसी तरह रोहित कॉलेज़, सीमा स्कूल और मिस्टर सूर्यकान्त अपने ऑफ़िस जाते हैं।

यही है रोज़ का इस घर का किस्सा !

समय बीत रहा है।

एक दिन अचानक किसी का फ़ोन आया कि सीमा को कोई अगवा करके ले गया है और वो दो लाख रूपए मांग रहा है। पैसे ना देने पर सीमा का क्या हाल हो सकता है आप सभी जानते हैं।

घर पर सभी परेशान थे कि क्या होगा !

पुलिस में खबर नहीं कर सकते क्योंकि अपहरणकर्ता ने मना किया है और लड़की का मामला है।

रोहित का दिमाग बहुत तेज़ चलता है, इसलिए उसने अपनी तिगड़म लड़ानी शुरु कर दी।

सीमा के बारे में सभी को बहुत फ़िक्र हो रही थी, सूर्यकान्त की तो रातों की नींद भी उड़ चुकी थी, उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया था दो लाख रूपए इकट्ठे करने के लिए।

आज तीन दिन हो चुके थे लेकिन सीमा का कोई अता पता नही था।

आज रोहित भी घर नहीं आया। उसने फ़ोन करके कहा कि वो अपने दोस्त के घर पर ही रहेगा।

घर पर बहुत चिन्ता और परेशानी का माहौल था।

अब देखते हैं कि रोहित कहाँ है?

रोहित को पता लग चुका है कि सीमा कहाँ है और वो आज उसे छुडाने की कोशिश में है। सीमा को शहर से करीब ५० किलोमीटर दूर एक गाँव के एक कमरे में रखा गया है।

रोहित अपनी कोशिश में जुटा हुआ अपनी मंजिल के बहुत करीब पहुँच गया था। रोहित ये जान कर हैरान था कि अपहरणकर्ता का जो पता उसे मिला था उसके आस पास कोई भी सुरक्षा नहीं थी, बस एक सुनसान सी जगह थी।

रोहित ने अपनी जेब में एक खंज़र भी रखा हुआ था।

रोहित उस कमरे के पास पहुंचा और कमरे के अन्दर देखने के लिए कोई खिड़की वगैरह तलाशने लगा क्यूंकि रोहित जानना चाहता था कि अन्दर आदमी कितने हैं?

लेकिन अंदर देखते ही रोहित की आँखें फटी की फटी रह गईं, अंदर सीमा किसी लड़के के लण्ड को मुंह में लेकर बड़े ही प्यार से चूस रही थी। रोहित ने लड़के को पहचानने की कोशिश की- अरेऽऽऽऽ ! यह तो रोहित का पड़ोसी श्याम है !

रोहित को बुछ भी समझ नहीं आ रहा था। वो बस एकटक अन्दर झांक रहा था।

श्याम और सीमा दोनों एक ही बिस्तर पर नंगे लेटे हुए थे, श्याम सीमा की चूत में उंगली डाले हुए था, सीमा अपने चूतड़ों को उठा कर श्याम के लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी।

अब श्याम का पानी निकल चुका था और सीमा बहुत प्यार से उसका रसपान कर रही थी। अब श्याम ने सीमा की चूत को चाटना शुरू किया। वो कभी उस की चूत में ऊँगली डालता और कभी अपनी जीभ डालता।

दोनों बहुत मस्त हो रहे थे और रोहित ये सारा नज़ारा अपनी आँखों से देख रहा था और उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी छोटी बहन ऐसा कुछ अपनी मर्ज़ी से कर रही होगी।

देखते ही देखते श्याम का लण्ड एक बार फिर से तन कर खड़ा हो गया। सीमा ने कहा- श्याम तुम ३ दिन से सिर्फ मेरी चूत का मज़ा ले रहे हो, लेकिन एक बार भी तुमने मेरी गाण्ड की सैर नहीं की। प्लीज़, आज मेरी गाण्ड मारो ताकि मुझे भी तो पता चले कि गाण्ड मरवाने में कितना मज़ा आता है।

इतना बोलते ही श्याम ने सीमा को घोड़ी बना दिया और सीमा की गाण्ड पर हल्का सा थूक लगा कर उसकी गाण्ड मारने की तैयारी करने लगा। गाण्ड का छेद छोटा होने के कारण लण्ड अंदर नहीं जा पा रहा था।

बहुत कोशिश के बाद लण्ड अंदर चला गया। सीमा दर्द और मज़े से कराह रही थी, श्याम उसे भरपूर मज़ा दे रहा था।

कमरे से सिस्कारियों की आवाजें साफ़ सुनाई दे रही थी। सीमा बार बार चुदने को बेताब नज़र आ रही थी। रोहित की समझ में अब सब कुछ आने लगा था।

गाण्ड चोदने के बाद एक बार फिर से श्याम ने सीमा के मोम्मे चूसने शुरू किये, सीमा ने कहा- चूसो मेरी जान ! इन मोम्मों का सारा रस चूस लो, अब हमारे पास ४ दिन और हैं, इन ४ दिनों में जी भर के मेरे मोम्मे चूसो, मेरी चूत का भोंसड़ा बना दो और मेरी गाण्ड को फ़ाड़ डालो।

इसी बीच रोहित अन्दर आ गया, सीमा उसे देखते ही खड़ी हो गई, शायद सीमा समझ चुकी थी कि रोहित को सारी हकीक़त का पता चल गया है, सीमा और श्याम ने रोहित के पैर पकड़ लिए और घर पर कुछ भी ना बताने की अर्ज़ करने लगे।

सीमा ने रोहित को बताया कि वो श्याम को बहुत पसंद करती है लेकिन मॉम और डैड को बताने से डरती है, श्याम को जब २ लाख रुपये मिल जाते तो वो दोनों भाग कर शादी करने वाले थे।

रोहित ने उनकी बात सुनी और कहा- मैं तुम दोनों की शादी करवा दूंगा लेकिन सीमा को मेरे साथ घर वापिस चलना होगा, बाकी सब मैं देख लूँगा।

सीमा ने अपने कपड़े पहने और रोहित के साथ घर की ओर चल पड़ी।

रास्ते में रोहित ने गाड़ी रोक दी, सीमा समझ नहीं पा रही थी कि क्या होने वाला है। रोहित ने सीमा को गाड़ी से बाहर निकाला और एक ज़ोरदार तमाचा उस के गाल पर रसीद कर दिया। सीमा ने पूछा तो रोहित ने जवाब दिया- मेरी बहना श्याम ने तुमसे ज़बरदस्ती की और तुम्हारा बलात्कार भी किया है और ज़बरदस्ती करने वाला तमाचा बड़ी जोर से मारता है, तुम बाकी सभी जगह से ठीक लग रही हो, किसी भी तरह से ऐसा नहीं लगता कि तुम्हारा अपहरण और बलात्कार हुआ है।

२-३ ज़ोरदार तमाचे रसीद करने के बाद दोनों घर की ओर चल दिए।

घर पर अपनी बेटी को वापस आया हुआ देखकर सबके चेहरों पर ख़ुशी छा गई, सभी रोहित तारीफ़ कर रहे थे, सीमा ने मॉम और डैड को बताया कि अपहरणकर्ता बहुत ही खतरनाक था, रोहित भैया ने जान पर खेल कर मुझे उस के चंगुल से आज़ाद कराया।

सीमा ने मम्मी से ये भी बताया कि अपहरणकर्ता ३ दिन तक लगातार उसका बलात्कार करता रहा !

सीमा की यह बात सुनकर मॉम के होश उड़ गए, सभी कहने लगे कि अब सीमा की शादी कैसे हो पायेगी।

रोहित ने बात को संभाला और कहा कि सीमा के लिए कोई अच्छा लड़का मैं देख दूंगा, आप बस सीमा का ख्याल रखो, अभी सीमा को गहरा सदमा लगा है, क्या जाने सीमा ने ३ दिन कितनी परेशानी में काटे हैं !

थोड़े दिन बाद ही रोहित ने सीमा और श्याम की शादी की बात घर पर कर दी, दोनों परिवार राज़ी हो गए और सीमा से श्याम की शादी हो गई.

आजकल दोनों बेहद खुश हैं।

Anal& Hindi& Stories31 Mar 2009 05:48 am

आज घर में काफ़ी खुशी का माहौल था। लेकिन मैं सबसे ज्यादा खुश था और होऊँ भी क्यों ना, मेरी शादी जो थी।

शादी के बाद मैं अपनी बीवी सोनू को लेकर अभी घर आया था। सोनू ने अपना पहला पैर घर के अन्दर रखा और अपने पैर से चावलों का बर्तन गिरा दिया। मेरी माँ और मेरी बहनें उसे लेकर अन्दर चली गई। घर में सब लोग अपने काम में लगे हुए थे, लेकिन मैं रात का इन्तज़ार कर रहा था।

आज मेरी सुहाग रात जो थी।

रात हुई और मैं अपने कमरे में आया, सोनू बैड पर मेरा इन्तज़ार कर रही थी, मैंने दरवाजे की कुंडी अन्दर से बन्द कर दी। शायद सोनू ने मुझे देखा और अपनी नज़रें झुका लीं। मैं बैड के पास आया और सोनू के पास बैठ गया।

बातें करते करते मैने अपना हाथ सोनू की जाँघ पर रख दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया, अब मैंने अपने हाथों से उसका चेहरा उठाया और उसके गालों पर चूम लिया। उसने अपनी आँखे बन्द कर लीं। अब मैंने उसके होंठों पर चूमा।

उफ़ऽऽ !!

क्या गुलाब की पंखुड़ी जैसे मलाईदार होंठ थे। मैंने उसके होंठो को चूसना शुरु किया और धीरे धीरे अपने हाथ उसके शरीर पर चलाने लगा। उसकी साँसें तेज होने लगी। मैंने उसके उरोजों पर हाथ रखा और उनको दबाने लगा उसके मुँह से सी…। सी…॥ की अवाजें निकलने लगी।

वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरु किये, पहले साड़ी, फिर ब्लाउज और फिर पेटिकोट अब वो सिर्फ़ लाल रंग की ब्रा और पैन्टी में थी। उसको इस तरह से देख कर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। उफ़ ! क्या गजब का बदन था उसका ! दूध की तरह सफ़ेद बदन और उसके ऊपर लाल रंग की ब्रा और पैन्टी ! सोनू बिल्कुल अप्सरा की तरह लग रही थी।

मेरा लंड एकदम खड़ा हो चुका था और पैन्ट फाड कर बाहर आने को बेताब था। मैंने अपना अन्डरवियर छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिये और सोनू ऊपर आकर उसको बेतहाशा चूमने लगा। अब मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके दोनों कबूतरों को आज़ाद कर दिया। क्या मस्त बूब्स थे उसके ! एकदम टाईट !

मैं उसके दोनों कबूतरों को चूसने लगा। उसके मुँह से सी……सी……उफ़्……हाय्…… की आवाजें निकलने लगी।

वो कहने लगी- जानेमन और जोर से चूसो ! मसल दो इनको !

अब मैंने उसकी पैन्टी को भी उतार दिया। क्या चूत थी उसकी ! एकदम गुलाबी ! एक भी बाल नहीं था ! उसकी चूत की दोनों फांके फडक रही थी।

मैंने पागलों की तरह उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया। उसने अपनी दोनों टाँगों को उठा कर मेरे कन्धों पर रख दिया और मेरा सर अपने हाथों से अपनी चूत पर दबा दिया और बोलने लगी- और जोर से चाटो ! आज मेरा सारा पानी निकाल दो मेरे सैंया !

मैं भी उसकी चूत को जोर जोर से चाटने लगा। मेरा मन ऐसा कर रहा था कि उसकी चूत में ही घुस जाऊँ !

मैंने चाट चाट कर उसका सारा पानी निकाल दिया।

मैंने अपना अन्डरवियर भी उतार दिया और अपना ७ इन्च लम्बा और ३ इन्च मोटा लंड उसके हाथ में दे दिया। उसने मेरे लंड को देखा और कहा- इतना मोटा लंड मेरी चूत के अन्दर कैसे घुसेगा?

मैंने कहा- जानेमन घुसेगा तो बाद में, पहले इसका स्वाद तो लो !

उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और उसको चूसने लगी। उसने मेरे लंड की चमड़ी को ऊपर से अलग किया और मेरे लंड के सुपाड़े को चूसने लगी। उसके इस तरह से लंड चूसने से मैं पागल हो गया।

अब हम ६९ की पोजिशन में आ गये। हाय ! क्या चूतड़ थे उसके ! एक दम गोल और मोटे मोटे ! मैन उसके चूतड़ों को मसलना शुरु कर दिया जिससे वो और उत्तेजित हो गई और जोर जोर से मेरे लंड को चूसने लगी। उसके इस तरह चूसने से मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया।

अब मैंने अपने लंड और उसकी चूत को साफ़ किया और उसको उठा कर बैड पर चित लिटा दिया। मैंने उसकी दोनों टाँगों को अपने कन्धों पर रखा और अपना लंड उसकी चूत के दरवाजे पर लगा कर धक्का दिया। उसके मुँह से आह निकल गई। उसकी चूत बहुत टाईट थी जिसकी वजह से मेरा लंड अन्दर नहीं जा रहा था।

अब मैंने थोड़ा जोर से धक्का लगाया जिससे मेरा आधा लंड चूत के अन्दर घुस गया। सोनू के मुँह से चिल्लाने की आवाजें निकलने लगी।

उसने कहा- प्लीज बाहर निकालो बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- थोड़ा तो दर्द होगा ही ! अब मैंने थोड़ा और ज़ोर से धक्का लगाया जिससे मेरा पूरा लंड चूत के अन्दर घुस गया। सोनू ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी। मैंने तुरन्त उसके मुँह पर अपना मुँह रख दिया जिससे उसके मुँह से आवाज नहीं निकले। मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा, फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किये।

उसका भी दर्द अब थोड़ा कम हो गया था। अब वो भी चुदाई में साथ देने लगी और अपने चूतड़ों को उठा उठा कर धक्के लगाने लगी। मेरे भी धक्के तेज होने लगे थे। पूरे कमरे में बस सी……सी……आह्……आह्…… की आवाजें सुनाई दे रही थी।

सोनू भी बोलने लगी- और ज़ोर ज़ोर से चोदो ! फाड़ दो मेरी चूत को ! आज की रात मत रुकना !

और मैं भी ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था। अब मैने सोनू को अपने ऊपर लिया और उसकी चूत में अपने लंड को पेल दिया। अब वो मुझे चोद रही थी। मैं भी उसके चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे से धक्के लगा रहा था। करीब १० मिनट की चुदाई के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा मुझे पता चल गया कि अब वो झड़ने वाली है।

मैं झटके से उसके ऊपर आ गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा। उसने मेरे सारे बदन को जकड़ लिया। मेरे शरीर पर उसके नाखूनों के खरोंचों के निशान पड़ चुके थे। ज़ोर से आवाज करती हुई वो झड़ गई।

अब मैंने और ज़ोर से धक्के लगाने शुरु कर दिये। करीब १० मिनट तक मैं उसको चोदता रहा अब मैं भी झड़ने के करीब आ रहा था। मैंने उसके दोनों ऊरोज़ो को ज़ोर से पकड़ लिया और धक्के लगाते हुए झड़ गया और उसके ऊपर ही निढ़ाल पड़ गया।

सोनू बोली- समीर तुम्हारा लंड तो कमाल का है ! क्या ज़बरदस्त चुदाई करता है।

मैं बोला- जानेमन अभी चुदाइ पूरी कहाँ हुई है ! अभी तो पूरी रात पड़ी है।

वो बोली- सच ! क्या पूरी रात तुम मुझे ऐसे ही चोदोगे?

मैंने कहा- बिल्कुल और अभी तो तुम्हारी गांड भी मारनी है। तुम्हारे चूतड़ों ने तो मुझे पागल कर दिया है। जब तक तुम्हारी गांड नहीं चुदेगी तब तक सुहाग रात का मज़ा ही कहाँ पूरा होगा।

अब वो मेरे लंड से खेलने लगी। और मेरी दोनों चूंचियों को चूसने लगी। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। वो मेरे लंड को अपने हाथों से आगे पीछे करने लगी। मैंने उसको उठाया और घोड़ी बना दिया और उसकी चूत को चाटने लगा। मैं अपनी जीभ से उसकी गांड के छेद को भी चोदने लगा।

उसने अपने दोनों हाथों से मेरे सर को अपनी गांड में दबा दिया। मैंने अपने थूक से उसकी गांड को गीला कर दिया और अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर लगा कर ज़ोर से धक्का दिया। मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। उसने अपनी गांड को दबा कर कस लिया जिससे मेरा लंड ना आगे हो रहा था और ना ही पीछे। शायद उसको भी गांड मराने में मज़ा रहा था।

अब मैंने ज़ोर से धक्का दिया जिससे मेरा पूरा लंड उसकी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। अब मैंने धक्के लगाने शुरु किये और वो भी साथ देने लगी, वो भी अपने चूतड़ों को हिला हिला कर धक्के लगाने लगी। पूरा कमरा धप्…धप… की आवाजों से भर गया था। सोनू के मुँह से भी सिसकारियाँ निकलने लगी। उसके मुँह से निकली सिसकारियों की आवाज से मेरे अन्दर उत्तेजना भर गई और मैं और ज़ोर से धक्के लगाने लगा। उसके चूतड़ों से जब मेरी जांघ टकराती तो ऐसा लगता जैसे तबले पर थाप पड़ रही हो।

अब मैंने उसको बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसके पैरों को अपने कंधो पर रख कर उसकी गांड में अपना लंड घुसा दिया। मेरा लंड बिना किसी अड़चन के पूरा अन्दर घुस गया और मेरे धक्के फिर से शुरू हो गये। अब मेरे धक्कों में तेजी आती जा रही थी मेरा सारा शरीर अकड़ने लगा और मैं आनन्द की चरम सीमा पर पहुँच कर उसकी गांड में ही झड़ गया।

मैंने अपना लंड उसकी गांड में से निकाला तो फक की आवाज से मेरा लंड बाहर निकल गया और मेरे वीर्य की बूंदें बाहर निकल कर चादर पर गिरने लगी।

सोनू को भी बहुत मज़ा आया गांड चुदवा कर। सवेरे के ४ बज चुके थे हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर नंगे ही सो गये। हमारे बिस्तर की चादर पर पड़ी हुई खून और वीर्य की बूंदें सोनू की कुंवारी चूत और रात के खेल की सारी कहानी बयान कर रहे थे।

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